श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.39.58 
सुमुहूर्तं तु तद् युद्धमभवल्लोमहर्षणम्।
भुजप्रहारसंयुक्तं वृत्रवासवयोरिव॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
वृत्रासुर और इन्द्र के समान उन दोनों का वह रोमांचकारी युद्ध दो घड़ी तक चलता रहा ॥58॥
 
Like Vritrasur and Indra, that thrilling battle between them continued for two hours. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)