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mahabharat 3.39.54-55: तब भगवान शंकर ने विशाल किरातरूप धारण करके उन वृक्षों और शिलाओं को भी अपने अधीन कर लिया। यह देखकर महाबली कुन्तीकुमार अपने वज्ररूपी रूप से भगवान शिव पर प्रहार करने लगे। उस समय क्रोध के कारण अर्जुन के मुख में भयंकर तीक्ष्ण ध्वनि निकल रही थी॥54-55॥   |   mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  3.39.54-55 
तदा वृक्षान् महाकाय: प्रत्यगृह्णादथो शिला:।
किरातरूपी भगवांस्तत: पार्थो महाबल:॥ ५४॥
मुष्टिभिर्वज्रसंकाशैर्धूममुत्पादयन् मुखे।
प्रजहार दुराधर्षे किरातसमरूपिणि॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान शंकर ने विशाल किरातरूप धारण करके उन वृक्षों और शिलाओं को भी अपने अधीन कर लिया। यह देखकर महाबली कुन्तीकुमार अपने वज्ररूपी रूप से भगवान शिव पर प्रहार करने लगे। उस समय क्रोध के कारण अर्जुन के मुख में भयंकर तीक्ष्ण ध्वनि निकल रही थी॥54-55॥
 
Then Lord Shankar in the form of a giant Kirat took over those trees and rocks also. Seeing this, the mighty Kuntikumar started attacking Lord Shiva with his thunderbolt like form. At that time, Arjun's mouth was full of anger due to anger. 54-55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)