श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.39.43 
ततो हृष्टमना जिष्णुर्नाराचान् मर्मभेदिन:।
व्यसृजच्छतधा राजन् मयूखानिव भास्कर:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
राजन! ऐसा विचारकर प्रसन्नचित्त अर्जुन ने हजारों किरणों को फैलाने वाले भगवान भास्कर के समान सैकड़ों भेदी नारियाँ चलाईं॥43॥
 
Rajan! Thinking this, the happy Arjuna, like Lord Bhaskara, who spreads thousands of rays, fired hundreds of piercing slogans. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)