श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.39.40 
कोऽयं देवो भवेत् साक्षाद् रुद्रो यक्ष: सुरोऽसुर:।
विद्यते हि गिरिश्रेष्ठे त्रिदशानां समागम:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
'यह कौन है? वास्तव में भगवान रुद्रदेव कोई यक्ष, देवता या राक्षस नहीं हैं। इस महान पर्वत पर देवता आते-जाते रहते हैं। 40॥
 
'Who is this? Actually Lord Rudradev is not a Yaksha, a deity or a demon. The gods keep coming and going on this great mountain. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)