vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति
»
श्लोक 38
श्लोक
3.39.38
स दृष्ट्वा बाणवर्षं तु मोघीभूतं धनंजय:।
परमं विस्मयं चक्रे साधु साध्विति चाब्रवीत्॥ ३८॥
अनुवाद
धनंजय को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसके सारे बाण व्यर्थ चले गए। वे किरात की स्तुति करने लगे और बोले-॥38॥
Dhananjaya was very surprised to see that all his arrows had gone in vain. He started praising Kirat and said -॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×