श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.39.36 
ततोऽर्जुन: शरवर्षं किराते समवासृजत्।
तत् प्रसन्नेन मनसा प्रतिजग्राह शङ्कर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अर्जुन ने किरातपर बाणोंकी वर्षा आरम्भ की; परंतु भगवान शंकरने प्रसन्न मनसे उन सब बाणोंको स्वीकार कर लिया॥36॥
 
After that Arjun started raining arrows on Kirat; But Lord Shankar accepted all those arrows with a happy mind. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)