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mahabharat 3.39.35: तत्पश्चात् वे दोनों क्रोध में भरकर सर्परूपी बाणों से एक दूसरे को बार-बार घायल करने लगे। उस समय वे दोनों अत्यन्त सुन्दर दिखने लगे। 35.   |   mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.39.35 
ततस्तौ तत्र संरब्धौ राजमानौ मुहुर्मुहु:।
शरैराशीविषाकारैस्ततक्षाते परस्परम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे दोनों क्रोध में भरकर सर्परूपी बाणों से एक दूसरे को बार-बार घायल करने लगे। उस समय वे दोनों अत्यन्त सुन्दर दिखने लगे। 35.
 
Thereafter both of them, filled with anger, began wounding each other repeatedly with snake-shaped arrows. At that time both of them began to look very beautiful. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)