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mahabharat 3.39.33-34h: तब किरात ने प्रसन्नतापूर्वक अर्जुन के छोड़े हुए सब बाण पकड़ लिए और कहा- 'हे मूर्ख! और बाण चला, और बाण चला, इन भेदी बाणों से आक्रमण कर।' ॥33 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  3.39.33-34h 
ततो हृष्टेन मनसा प्रतिजग्राह सायकान्।
भूयो भूय इति प्राह मन्दमन्देत्युवाच ह॥ ३३॥
प्रहरस्व शरानेतान्नाराचान् मर्मभेदिन:।
 
 
अनुवाद
तब किरात ने प्रसन्नतापूर्वक अर्जुन के छोड़े हुए सब बाण पकड़ लिए और कहा- 'हे मूर्ख! और बाण चला, और बाण चला, इन भेदी बाणों से आक्रमण कर।' ॥33 1/2॥
 
Then Kirat happily caught all the arrows shot by Arjun and said- 'O fool! Shoot more arrows, shoot more arrows, attack with these piercing arrows.' ॥ 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)