श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.39.29 
ममैष लक्ष्यभूतो हि मम पूर्वपरिग्रह:।
ममैव च प्रहारेण जीविताद् व्यपरोपित:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
मैंने ही सबसे पहले उसे अपने बाणों का निशाना बनाया था, इसलिए मैंने तुमसे पहले ही उस पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था। मेरे ही तीखे प्रहार के कारण इस राक्षस को अपने प्राण गँवाने पड़े ॥29॥
 
I was the first one to make him the target of my arrows, hence I had established my authority over him before you. It is because of my sharp attack that this demon had to lose his life. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)