श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.39.28 
किरात उवाच
मयैष धन्वनिर्मुक्तैस्ताडित: पूर्वमेव हि।
बाणैरभिहत: शेते नीतश्च यमसादनम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
किरातरूपी शिवजी ने कहा- मैंने अपने धनुष से छोड़े हुए बाणों से इसे पहले ही घायल कर दिया है। मेरे बाणों से घायल होकर यह सदा के लिए सो गया है और यमलोक में पहुँच गया है॥ 28॥
 
Shiv in the form of Kirat said- I had already injured him with the arrows shot from my bow. After getting hit by my arrows, he is sleeping forever and has reached Yamaloka.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)