श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.39.27 
एष चापि मया जन्तुर्मृगरूपं समाश्रित:।
राक्षसो निहतो घोरो हन्तुं मामिह चागत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यह जीव भयंकर पशु का रूप धारण करके मुझे मारने के लिए यहाँ आया था; इसलिए मैंने इस भयंकर राक्षस को मार डाला है ॥27॥
 
This creature had taken the form of a ferocious animal and had come here to kill me; therefore, I have killed this terrible demon. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)