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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति
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श्लोक 24
श्लोक
3.39.24
त्वया तु दुष्कर: कस्मादिह वास: प्ररोचित:।
वयं तु बहुसत्त्वेऽस्मिन्निवसामस्तपोधन॥ २४॥
अनुवाद
'परन्तु आपने इस कठिन धाम का चयन कैसे किया? हे तपस्वी! हम लोग तो इस वन में, जो नाना प्रकार के पशुओं से भरा हुआ है, सदैव निवास करते हैं॥ 24॥
'But how did you choose this difficult abode? O ascetic! We always live in this forest which is filled with various kinds of animals.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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