श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.39.23 
न मत्कृते त्वया वीर भी: कार्या वनमन्तिकात्।
इयं भूमि: सदास्माकमुचिता वसतां वने॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! हमारे वन के निकट आने से मत डरो। हम वनवासी हैं, अतः हमारा इस भूमि पर विचरण करना सर्वदा उचित है॥ 23॥
 
‘Valiant! Do not be afraid of us coming near the forest. We are forest dwellers, hence it is always appropriate for us to roam on this land.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)