श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.39.22 
इत्युक्त: पाण्डवेयेन किरात: प्रहसन्निव।
उवाच श्लक्ष्णया वाचा पाण्डवं सव्यसाचिनम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डु नन्दन अर्जुन के ऐसा कहने पर किरात वेषधारी भगवान शंकर जोर से हँसे और सव्यसाची मधुर वाणी में पाण्डवों से बोले-॥22॥
 
On Pandanu Nandan Arjun saying this, Lord Shankar dressed in Kirat laughed loudly and Savyasachi spoke to the Pandavas in a sweet voice – ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)