श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.39.19 
न त्वमस्मिन् वने घोरे बिभेषि कनकप्रभ।
किमर्थं च त्वया विद्धो वराहो मत्परिग्रह:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे स्वर्ण के समान चमकते हुए पुरुष! क्या तुम्हें इस भयंकर वन में भय नहीं लगता? यह सूअर मेरा लक्ष्य था, फिर तुमने इस पर बाण क्यों चलाया?॥19॥
 
'O man shining like gold! Are you not afraid in this dreadful forest? This boar was my target, why did you shoot an arrow at it?॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)