Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.39.17-18: उसी समय शत्रुओं का नाश करने वाले अर्जुन ने सुवर्ण के समान चमकने वाले एक तेजस्वी पुरुष को देखा, जो स्त्रियों के साथ आया हुआ था और किरात वेश में छिपा हुआ था। तब कुन्तीकुमार प्रसन्न होकर हँसकर बोले - 'तुम कौन हो जो स्त्रियों से घिरे हुए इस निर्जन वन में विचरण कर रहे हो?' 17-18॥ | mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ददर्श ततो जिष्णु: पुरुषं काञ्चनप्रभम्।
किरातवेषसंच्छन्नं स्त्रीसहायममित्रहा॥ १७॥
तमब्रवीत् प्रीतमना: कौन्तेय: प्रहसन्निव।
को भवानटते शून्ये वने स्त्रीगणसंवृत:॥ १८॥
अनुवाद
उसी समय शत्रुओं का नाश करने वाले अर्जुन ने सुवर्ण के समान चमकने वाले एक तेजस्वी पुरुष को देखा, जो स्त्रियों के साथ आया हुआ था और किरात वेश में छिपा हुआ था। तब कुन्तीकुमार प्रसन्न होकर हँसकर बोले - 'तुम कौन हो जो स्त्रियों से घिरे हुए इस निर्जन वन में विचरण कर रहे हो?' 17-18॥
At the same time, Arjuna, the destroyer of enemies, saw a brilliant man, shining like gold, who had come with the women and was hiding himself in the garb of Kirat. Then Kuntikumar became happy and said laughingly - 'Who are you who is wandering in this desolate forest surrounded by women?' 17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥