श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.39.15 
यथाशनेर्विनिर्घोषो वज्रस्येव च पर्वते।
तथा तयो: संनिपात: शरयोरभवत् तदा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे पर्वत पर बिजली गिरने और गड़गड़ाहट की भयंकर ध्वनि होती है, उसी प्रकार उन दो बाणों के प्रहार की भी भयंकर ध्वनि हुई ॥15॥
 
Just as there is a terrible sound of thunder and lightning striking a mountain, similarly there was a sound of the impact of those two arrows. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)