मयैष प्रार्थित: पूर्वमिन्द्रकीलसमप्रभ:।
अनादृत्य च तद् वाक्यं प्रजहाराथ फाल्गुन:॥ १२॥
अनुवाद
फिर उसने कहा, ‘मैंने इस वराह को, जिसकी चमक इन्द्रकील पर्वत के समान है, अपना लक्ष्य बना लिया है, इसलिए इसे मत मारो।’ परंतु अर्जुन ने किरात की बात अनसुनी करके उस पर आक्रमण कर दिया।॥12॥
Then he said, 'I have already made this boar, whose brilliance is like the Indrakil mountain, my target, so do not kill him.' But Arjuna disregarded Kirata's words and attacked him. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)