श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.39.10 
यन्मां प्रार्थयसे हन्तुमनागसमिहागतम्।
तस्मात् त्वां पूर्वमेवाहं नेताद्य यमसादनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
"अरे! तू मुझ निरपराध व्यक्ति को मारने के इरादे से यहाँ आया है। इसलिए मैं तुझे आज ही यमलोक पहुँचा दूँगा।" ॥10॥
 
"Hey! You have come here with the intention of killing me, an innocent person. That is why I will send you to Yamaloka today itself." ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)