श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 38: अर्जुनकी उग्र तपस्या और उसके विषयमें ऋषियोंका भगवान् शंकरके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.38.9 
वैशम्पायन उवाच
कथयिष्यामि ते तात कथामेतां महात्मन:।
दिव्यां पौरवशार्दूल महतीमद्‍भुतोपमाम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "मेरे प्रिय भाई! महात्मा अर्जुन की यह कथा दिव्य, अद्भुत और महत्वपूर्ण है; मैं इसे तुम्हें सुना रहा हूँ।"
 
Vaishmpayana said, "My dear brother! This story of Mahatma Arjun is divine, wonderful and important; I am narrating it to you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)