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mahabharat 3.38.35: वैशम्पायन कहते हैं - भगवान शंकर के ये वचन सुनकर सत्यवादी ऋषि प्रसन्न होकर अपने आश्रम को लौट गए।   |   mahabharat अध्याय 3.38: अर्जुनकी उग्र तपस्या और उसके विषयमें ऋषियोंका भगवान् शंकरके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 38: अर्जुनकी उग्र तपस्या और उसके विषयमें ऋषियोंका भगवान् शंकरके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.38.35 
वैशम्पायन उवाच
तच्छ्रुत्वा शर्ववचनमृषय: सत्यवादिन:।
प्रहृष्टमनसो जग्मुर्यथा स्वान् पुनरालयान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - भगवान शंकर के ये वचन सुनकर सत्यवादी ऋषि प्रसन्न होकर अपने आश्रम को लौट गए।
 
Vaishmpayana says - After listening to these words of Lord Shankar, the truthful sage became happy and returned to his ashram.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कैरातपर्वणि मुनिशङ्करसंवादे अष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कैरातपर्वमें महर्षियों तथा भगवान् शंकरके संवादसे सम्बन्ध रखनेवाला अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)