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वैशम्पायन कहते हैं - भगवान शंकर के ये वचन सुनकर सत्यवादी ऋषि प्रसन्न होकर अपने आश्रम को लौट गए।
Vaishmpayana says - After listening to these words of Lord Shankar, the truthful sage became happy and returned to his ashram.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कैरातपर्वणि मुनिशङ्करसंवादे अष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कैरातपर्वमें महर्षियों तथा भगवान् शंकरके संवादसे सम्बन्ध रखनेवाला अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥