Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.38.32-33: महादेवजी ने कहा- महर्षि! अर्जुन के विषय में आपको दुःख करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आलस्य से तुरंत मुक्त हो जाओ और जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार प्रसन्नतापूर्वक लौट जाओ। अर्जुन के मन में जो संकल्प है, उसे मैं भली-भाँति जानता हूँ॥32-33॥ | mahabharat अध्याय 3.38: अर्जुनकी उग्र तपस्या और उसके विषयमें ऋषियोंका भगवान् शंकरके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महादेव उवाच
न वो विषाद: कर्तव्य: फाल्गुनं प्रति सर्वश:॥ ३२॥
शीघ्रं गच्छत संहृष्टा यथागतमतन्द्रिता:।
अहमस्य विजानामि संकल्पं मनसि स्थितम्॥ ३३॥
अनुवाद
महादेवजी ने कहा- महर्षि! अर्जुन के विषय में आपको दुःख करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आलस्य से तुरंत मुक्त हो जाओ और जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार प्रसन्नतापूर्वक लौट जाओ। अर्जुन के मन में जो संकल्प है, उसे मैं भली-भाँति जानता हूँ॥32-33॥
Mahadevji said- Maharshi! There is no need for you to feel any sadness about Arjuna. Be immediately free from laziness and return back as happily as you came. I know very well the resolve that is in Arjun's mind. 32-33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥