Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.38.19: वहाँ उसने फूलों से सुशोभित अनेक वृक्ष देखे, जो पक्षियों के मधुर स्वर से गूँज रहे थे। उसने वैदूर्य के समान निर्मल जल से भरी हुई अनेक सुन्दर नदियाँ देखीं, जिनमें अनेक भँवरें उठ रही थीं॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.38: अर्जुनकी उग्र तपस्या और उसके विषयमें ऋषियोंका भगवान् शंकरके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ उसने फूलों से सुशोभित अनेक वृक्ष देखे, जो पक्षियों के मधुर स्वर से गूँज रहे थे। उसने वैदूर्य के समान निर्मल जल से भरी हुई अनेक सुन्दर नदियाँ देखीं, जिनमें अनेक भँवरें उठ रही थीं॥19॥
There he saw many trees adorned with flowers, which were resonating with the sweet sounds of birds. He saw many beautiful rivers filled with water as clear as vaidurya, in which many whirlpools were rising.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥