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श्लोक  3.38.14 
त्वरया परया युक्तस्तपसे धृतनिश्चय:।
वनं कण्टकितं घोरमेक एवान्वपद्यत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तपस्या करने का निश्चय करके वह अकेले ही बड़ी शीघ्रता से चल पड़ा और एक भयंकर कंटीले जंगल में जा पहुँचा।
 
Having determined to perform tapasya, he went alone in great haste and reached a dreadful thorny forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)