Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.37.52-55: तब महेन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक मुस्कुराते हुए कहा, 'धनंजय! जब तुम यहाँ पहुँच ही गए हो, तो अब तुम अस्त्र-शस्त्रों का क्या करना चाहते हो? अब अपनी इच्छानुसार उत्तम लोक मांग लो; क्योंकि तुम उत्तम गति को प्राप्त हो चुके हो।' यह सुनकर धनंजय ने पुनः देवताओं के राजा से कहा, 'देवेश्वर! मैं न तो देवत्व चाहता हूँ, न अपने भाइयों को वन में छोड़कर (शत्रुओं से) बदला लिए बिना समस्त देवताओं का सुख या धन प्राप्त करना चाहता हूँ। यदि मैं ऐसा करूँगा, तो समस्त लोकों में सदा के लिए मेरी बड़ी बदनामी होगी।' | mahabharat अध्याय 3.37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब महेन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक मुस्कुराते हुए कहा, 'धनंजय! जब तुम यहाँ पहुँच ही गए हो, तो अब तुम अस्त्र-शस्त्रों का क्या करना चाहते हो? अब अपनी इच्छानुसार उत्तम लोक मांग लो; क्योंकि तुम उत्तम गति को प्राप्त हो चुके हो।' यह सुनकर धनंजय ने पुनः देवताओं के राजा से कहा, 'देवेश्वर! मैं न तो देवत्व चाहता हूँ, न अपने भाइयों को वन में छोड़कर (शत्रुओं से) बदला लिए बिना समस्त देवताओं का सुख या धन प्राप्त करना चाहता हूँ। यदि मैं ऐसा करूँगा, तो समस्त लोकों में सदा के लिए मेरी बड़ी बदनामी होगी।'
Then Mahendra happily said smilingly, 'Dhananjaya! When you have reached here, what do you want to do with the weapons? Now ask for the best world as per your wish; because you have attained the best destination.' Hearing this, Dhananjaya again said to the king of gods, 'Deveshwar! I do not want divinity, nor do I wish to acquire happiness or the wealth of all the gods without leaving my brothers in the forest and taking revenge (from the enemies). If I do so, then I will get great infamy in all the worlds forever.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥