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mahabharat 3.37.51: 'प्रभो! मैं आपसे सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूँ, यही मेरी अभीष्ट इच्छा है; अतः आप मुझे यह वर प्रदान करें।'॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 3.37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.37.51 
ईप्सितो ह्येष वै कामो वरं चैनं प्रयच्छ मे।
त्वत्तोऽद्य भगवन्नस्त्रं कृत्स्नमिच्छामि वेदितुम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! मैं आपसे सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूँ, यही मेरी अभीष्ट इच्छा है; अतः आप मुझे यह वर प्रदान करें।'॥ 51॥
 
'Lord! I want to acquire the knowledge of all the weapons from you, this is my desired wish; hence grant me this boon.'॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)