श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.37.5 
दैवं ब्राह्मं मानुषं च सयत्नं सचिकित्सितम्।
सर्वास्त्राणां प्रयोगं च अभिजानन्ति कृत्स्नश:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह देव, ब्रह्मा और मनुष्य तीनों तंत्रों के अनुसार समस्त अस्त्र-शस्त्रों के प्रयोग की समस्त कलाओं को जानता है। वह उन अस्त्रों को ग्रहण करने और धारण करने की विधि से तो परिचित है ही, शत्रुओं द्वारा प्रयुक्त अस्त्रों का उपचार (निवारण करने के उपाय) भी जानता है।॥5॥
 
He knows all the arts of using all the weapons according to the three systems of God, Brahma and Manush. He is not only familiar with the process of accepting and wearing those weapons, he also knows the treatment (methods to prevent) of the weapons used by the enemies.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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