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mahabharat 3.37.49: तब ब्राह्मण देवता पुनः प्रसन्न हो गए और मुस्कुराते हुए उससे बोले, 'हे शत्रुयोद्धा! तुम्हारा कल्याण हो। मैं स्वयं इन्द्र हूँ। मुझसे कोई भी वर माँग लो।'   |   mahabharat अध्याय 3.37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.37.49 
तमुवाच तत: प्रीत: स द्विज: प्रहसन्निव।
वरं वृणीष्व भद्रं ते शक्रोऽहमरिसूदन॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण देवता पुनः प्रसन्न हो गए और मुस्कुराते हुए उससे बोले, 'हे शत्रुयोद्धा! तुम्हारा कल्याण हो। मैं स्वयं इन्द्र हूँ। मुझसे कोई भी वर माँग लो।'
 
Then the Brahmin god became happy again and smilingly said to him, 'O enemy warrior! May you be blessed. I am Indra himself. Ask me for any boon.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)