Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.37.48: 'वीर! तुम्हारे समान बल और तेज में कोई पुरुष नहीं है!' इस प्रकार मुनि ने बार-बार मुस्कुराते हुए अर्जुन से धनुष त्यागने के लिए कहा। किन्तु अर्जुन ने धनुष न त्यागने का दृढ़ निश्चय कर लिया था; अतः मुनि उसका धैर्य भंग न कर सके। | mahabharat अध्याय 3.37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ओजसा तेजसा वीर यथा नान्य: पुमान् क्वचित्।
तथा हसन्निवाभीक्ष्णं ब्राह्मणोऽर्जुनमब्रवीत्।
न चैनं चालयामास धैर्यात् सुधृतनिश्चयम्॥ ४८॥
अनुवाद
'वीर! तुम्हारे समान बल और तेज में कोई पुरुष नहीं है!' इस प्रकार मुनि ने बार-बार मुस्कुराते हुए अर्जुन से धनुष त्यागने के लिए कहा। किन्तु अर्जुन ने धनुष न त्यागने का दृढ़ निश्चय कर लिया था; अतः मुनि उसका धैर्य भंग न कर सके।
'Valiant! There is no man like you in vigour and brilliance!' Thus the sage repeatedly asked Arjuna smilingly to give up the bow. But Arjuna had firmly resolved not to give up the bow; hence the sage could not disturb his patience.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥