श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.37.4 
युधिष्ठिर उवाच
भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे द्रोणपुत्रे च भारत।
धनुर्वेदश्चतुष्पाद एतेष्वद्य प्रतिष्ठित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, 'भरत! आजकल संपूर्ण धनुर्वेद अपने चारों भागों सहित भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण और अश्वत्थामा में स्थापित है।' 4.
 
Yudhishthira said, 'Bharata! Nowadays, the complete Dhanurveda with all its four parts is established in Bhishma Pitamah, Dronacharya, Krupacharya, Karna and Ashwatthama.' 4.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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