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mahabharat 3.37.25-26h: हममें से कोई भी क्षत्रिय कुल में जन्म न ले। उन ब्राह्मणों को नमस्कार है जो केवल भिक्षा पर निर्वाह करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  3.37.25-26h 
मास्माकं क्षत्रियकुले जन्म कश्चिदवाप्नुयात्॥ २५॥
ब्राह्मणेभ्यो नमो नित्यं येषां भैक्ष्येण जीविका।
 
 
अनुवाद
हममें से कोई भी क्षत्रिय कुल में जन्म न ले। उन ब्राह्मणों को नमस्कार है जो केवल भिक्षा पर निर्वाह करते हैं।
 
Let none of us be born in a Kshatriya family. Salutations to those Brahmins who subsist only on alms. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)