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mahabharat 3.37.14: धनंजय! इन्द्र को समस्त दिव्यास्त्रों का ज्ञान है। वृत्रासुर से भयभीत होकर समस्त देवताओं ने उस समय अपनी समस्त शक्ति इन्द्र को समर्पित कर दी थी ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 37: अर्जुनका सब भाई आदिसे मिलकर इन्द्रकील पर्वतपर जाना एवं इन्द्रका दर्शन करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.37.14 
इन्द्रे ह्यस्त्राणि दिव्यानि समस्तानि धनंजय।
वृत्राद् भीतैर्बलं देवैस्तदा शक्रे समर्पितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! इन्द्र को समस्त दिव्यास्त्रों का ज्ञान है। वृत्रासुर से भयभीत होकर समस्त देवताओं ने उस समय अपनी समस्त शक्ति इन्द्र को समर्पित कर दी थी ॥14॥
 
Dhananjaya! Indra has knowledge of all the divine weapons. All the gods, scared of Vritrasura, had surrendered all their power to Indra at that time. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)