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mahabharat 3.36.43: भरतश्रेष्ठ! वहाँ से महाबली पाण्डव अपने मन्त्रियों और सेवकों के साथ काम्यकवन में आये और पुनः वहीं बस गये॥43॥   |   mahabharat अध्याय 3.36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.36.43 
तत: काम्यकमासाद्य पुनस्ते भरतर्षभ।
न्यविशन्त महात्मान: सामात्या: सपरिच्छदा:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! वहाँ से महाबली पाण्डव अपने मन्त्रियों और सेवकों के साथ काम्यकवन में आये और पुनः वहीं बस गये॥43॥
 
Bharatshrestha! From there, the great Pandavas along with their ministers and servants came to Kamyakavan and settled there again. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)