vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन
»
श्लोक 41
श्लोक
3.36.41
स व्यासवाक्यमुदितो वनाद् द्वैतवनात् तत:।
ययौ सरस्वतीकूले काम्यकं नाम काननम्॥ ४१॥
अनुवाद
तत्पश्चात् व्यासजी की अनुमति लेकर वे द्वैतवन से प्रसन्नतापूर्वक काम्यकवन में चले गए, जो सरस्वती के तट पर शोभायमान है ॥41॥
Thereafter, with the permission of Vyasji, he happily went from Dwaitavan to Kamyakavan, which is beautiful on the banks of Saraswati. 41॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas