श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.36.40 
युधिष्ठिरस्तु धर्मात्मा तद् ब्रह्म मनसा यत:।
धारयामास मेधावी काले काले सदाभ्यसन्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
सदाचारी, बुद्धिमान और संयमी बुद्धि वाले युधिष्ठिर ने उस वेद मन्त्र को मन में धारण कर लिया और समय-समय पर उसका अभ्यास करने लगे ॥40॥
 
Yudhishthir, a virtuous, intelligent and balanced mind, imbibed that Vedic mantra in his mind and started practicing it from time to time. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)