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mahabharat 3.36.31-32: 'आपसे इन्हें प्राप्त करके महाबाहु अर्जुन अपने समस्त कार्य संपन्न करेंगे। पाण्डुनन्दन! इस अर्जुन को देवराज इन्द्र, रुद्र, वरुण, कुबेर और धर्मराज के पास जाकर दिव्यास्त्र प्राप्त करने चाहिए। अपनी तपस्या और पराक्रम से वे देवताओं का प्रत्यक्ष दर्शन कर सकेंगे।' 31-32॥   |   mahabharat अध्याय 3.36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  3.36.31-32 
यामवाप्य महाबाहुरर्जुन: साधयिष्यति।
अस्त्रहेतोर्महेन्द्रं च रुद्रं चैवाभिगच्छतु॥ ३१॥
वरुणं च कुबेरं च धर्मराजं च पाण्डव।
शक्तो ह्येष सुरान् द्रष्टुं तपसा विक्रमेण च॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'आपसे इन्हें प्राप्त करके महाबाहु अर्जुन अपने समस्त कार्य संपन्न करेंगे। पाण्डुनन्दन! इस अर्जुन को देवराज इन्द्र, रुद्र, वरुण, कुबेर और धर्मराज के पास जाकर दिव्यास्त्र प्राप्त करने चाहिए। अपनी तपस्या और पराक्रम से वे देवताओं का प्रत्यक्ष दर्शन कर सकेंगे।' 31-32॥
 
'Having received it from you, mighty-armed Arjun will accomplish all his tasks. Pandunandan! This Arjun should go to Devraj Indra, Rudra, Varun, Kuber and Dharmaraj to get divine weapons. Through their penance and bravery they will be able to see the gods directly. 31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)