श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.36.28 
तत एकान्तमुन्नीय पाराशर्यो युधिष्ठिरम्।
अब्रवीदुपपन्नार्थमिदं वाक्यविशारद:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वक्तृत्व-कुशल पराशरनन्दन व्यासजी ने युधिष्ठिर को एकान्त में ले जाकर उनसे ये ज्ञानपूर्ण वचन कहे-॥28॥
 
Thereafter, Parasharanandan Vyasji, skilled in oratory, took Yudhishthira alone and spoke these wise words to him -॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)