Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.36.25-26: हे शत्रु संहारक भरत! भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन तथा दुःशासन के कारण तुम्हारे हृदय में जो भय घर कर गया है, उसे मैं वैज्ञानिक विधि से नष्ट कर दूँगा। ॥25-26॥ | mahabharat अध्याय 3.36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे शत्रु संहारक भरत! भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन तथा दुःशासन के कारण तुम्हारे हृदय में जो भय घर कर गया है, उसे मैं वैज्ञानिक विधि से नष्ट कर दूँगा। ॥25-26॥
O enemy-killer Bharata! I will destroy the fear that has entered your heart due to Bhishma, Drona, Kripacharya, Karna, Ashwatthama, Dhritarashtra's son Duryodhana and Dushasan, by using the scientific methods. ॥25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥