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mahabharat 3.36.20: वृकोदर! सारथी पुत्र कर्ण के हाथों की फुर्ती समस्त धनुर्धरों से भी अधिक है। उसका स्मरण करते हुए मुझे अच्छी नींद नहीं आ रही है।   |   mahabharat अध्याय 3.36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.36.20 
न निद्रामधिगच्छामि चिन्तयानो वृकोदर।
अतिसर्वान् धनुर्ग्राहान् सूतपुत्रस्य लाघवम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वृकोदर! सारथी पुत्र कर्ण के हाथों की फुर्ती समस्त धनुर्धरों से भी अधिक है। उसका स्मरण करते हुए मुझे अच्छी नींद नहीं आ रही है।
 
Vrikodara! The agility of the hands of the son of a charioteer Karna is greater than that of all archers. Thinking of him I am unable to sleep well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)