Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.36.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! भीमसेन के वचन सुनकर शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, कुंतीपुत्र, नरसिंह युधिष्ठिर ने गहरी साँस लेकर मन ही मन सोचा - 'मैंने राजाओं और वर्णों के धर्म के निश्चित सिद्धांत सुने हैं, परंतु जो वर्तमान और भविष्य दोनों पर दृष्टि रखता है, वही सत्य को देखने वाला है।' ॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 3.36: युधिष्ठिरका भीमसेनको समझाना, व्यासजीका आगमन और युधिष्ठिरको प्रतिस्मृतिविद्याप्रदान तथा पाण्डवोंका पुन: काम्यकवनगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
भीमसेनवच: श्रुत्वा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
नि:श्वस्य पुरुषव्याघ्र: सम्प्रदध्यौ परंतप:॥ १॥
श्रुता मे राजधर्माश्च वर्णानां च विनिश्चया:।
आयत्यां च तदात्वे च य: पश्यति स पश्यति॥ २॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! भीमसेन के वचन सुनकर शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, कुंतीपुत्र, नरसिंह युधिष्ठिर ने गहरी साँस लेकर मन ही मन सोचा - 'मैंने राजाओं और वर्णों के धर्म के निश्चित सिद्धांत सुने हैं, परंतु जो वर्तमान और भविष्य दोनों पर दृष्टि रखता है, वही सत्य को देखने वाला है।' ॥1-2॥
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! On hearing Bhimasena's words, Yudhishthira, the son of Kunti, the lion of men who tormented his enemies, took a deep breath and thought to himself, 'I have heard the definite principles of the religion of kings and the castes, but the one who keeps an eye on both the present and the future is the one who sees the truth. ॥ 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥