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mahabharat 3.35.8: जिसका बल और पुरुषार्थ बहुत कम है और जो शत्रुता का बदला नहीं ले सकता, उसका जन्म अत्यंत नीच है। मैं उसके जन्म को निष्फल मानता हूँ ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.35.8 
यो न यातयते वैरमल्पसत्त्वोद्यम: पुमान्।
अफलं जन्म तस्याहं मन्ये दुर्जातजायिन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जिसका बल और पुरुषार्थ बहुत कम है और जो शत्रुता का बदला नहीं ले सकता, उसका जन्म अत्यंत नीच है। मैं उसके जन्म को निष्फल मानता हूँ ॥8॥
 
The birth of a person whose strength and endeavour are very less and who cannot take revenge of enmity is extremely despicable. I consider his birth to be fruitless. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)