Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.35.6: मनुष्य की मृत्यु तो उसके शरीर में ही रहती है; अतः हमें मृत्यु से पहले ही राज्य प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.35.6 
शरीरिणां हि मरणं शरीरे नित्यमाश्रितम्।
प्रागेव मरणात् तस्माद् राज्यायैव घटामहे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य की मृत्यु तो उसके शरीर में ही रहती है; अतः हमें मृत्यु से पहले ही राज्य प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए ॥6॥
 
The death of a mortal always remains in his body; therefore, we must strive to attain the kingdom before death. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)