श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  3.35.27-28h 
पुण्यकीर्ती राजपुत्री द्रौपदी वीरसूरियम्॥ २७॥
विश्रुता कथमज्ञाता कृष्णा पार्थ चरिष्यति।
 
 
अनुवाद
पार्थ! यह वीर एवं पवित्र राजकुमारी द्रौपदी तो सम्पूर्ण जगत में विख्यात है। वह वनवास के नियमों का पालन कैसे कर पाएगी? 27 1/2
 
Parth! This brave and pure princess Draupadi is famous in the whole world. How will she be able to follow the rules of exile? 27 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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