| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना » श्लोक 25-26h |
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| | | | श्लोक 3.35.25-26h  | बृहच्छाल इवानूपे शाखापुष्पपलाशवान्॥ २५॥
हस्ती श्वेत इवाज्ञात: कथं जिष्णुश्चरिष्यति। | | | | | | अनुवाद | | जहाँ जल की प्रचुरता है, वहाँ शाखाओं, फूलों और पत्तों से सुशोभित विशाल शाल वृक्ष के समान अथवा श्वेत हाथी ऐरावत के समान अर्जुन कैसे छिपे रह सकते हैं? ॥25 1/2॥ | | | | In a region where there is abundance of water, how can Arjuna, who is like a huge sal tree decorated with branches, flowers and leaves or like the white elephant Airavat, remain undetected? ॥25 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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