श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.35.12 
अयं च पार्थो बीभत्सुर्वरिष्ठो ज्याविकर्षणे।
आस्ते परमसंतप्तो नूनं सिंह इवाशये॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हमारा भाई अर्जुन धनुष की डोरी खींचने में श्रेष्ठ है; परंतु वह भी गुफा में उदास बैठे हुए सिंह के समान सदैव अत्यन्त व्याकुल रहता है ॥12॥
 
Our brother Arjuna is the best in pulling the bowstring; but he too is certainly always very distressed like a lion sitting sadly in his cave. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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