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श्लोक 3.35.10  |
हत्वा वै पुरुषो राजन्निकर्तारमरिंदम।
अह्नाय नरकं गच्छेत् स्वर्गेणास्य स सम्मित:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| हे शत्रुराज! यदि कोई मनुष्य अपने कपटी शत्रु को मारकर तुरन्त नरक में चला जाए, तो उसके लिए वह नरक भी स्वर्ग के समान है ॥10॥ |
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| O King of enemies! If a man kills his deceitful enemy and immediately goes to hell, then for him even that hell is like heaven. ॥10॥ |
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