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mahabharat 3.35.10: हे शत्रुराज! यदि कोई मनुष्य अपने कपटी शत्रु को मारकर तुरन्त नरक में चला जाए, तो उसके लिए वह नरक भी स्वर्ग के समान है ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 35: दु:खित भीमसेनका युधिष्ठिरको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.35.10 
हत्वा वै पुरुषो राजन्निकर्तारमरिंदम।
अह्नाय नरकं गच्छेत् स्वर्गेणास्य स सम्मित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुराज! यदि कोई मनुष्य अपने कपटी शत्रु को मारकर तुरन्त नरक में चला जाए, तो उसके लिए वह नरक भी स्वर्ग के समान है ॥10॥
 
O King of enemies! If a man kills his deceitful enemy and immediately goes to hell, then for him even that hell is like heaven. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)