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mahabharat 3.34.7: भीमसेन! धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन ने राज्य पाने की लालसा में हम पर संकट डाला था। उसने हमें अपना दास भी बनाया था, किन्तु उस समय द्रौपदी हमारी रक्षक बनी थी।   |   mahabharat अध्याय 3.34: धर्म और नीतिकी बात कहते हुए युधिष्ठिरकी अपनी प्रतिज्ञाके पालनरूप धर्मपर ही डटे रहनेकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 34: धर्म और नीतिकी बात कहते हुए युधिष्ठिरकी अपनी प्रतिज्ञाके पालनरूप धर्मपर ही डटे रहनेकी घोषणा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.34.7 
स नो राजा धृतराष्ट्रस्य पुत्रो
न्यपातयद् व्यसने राज्यमिच्छन्।
दास्यं च नोऽगमयद् भीमसेन
यत्राभवच्छरणं द्रौपदी न:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन! धृतराष्ट्रपुत्र राजा दुर्योधन ने राज्य पाने की लालसा में हम पर संकट डाला था। उसने हमें अपना दास भी बनाया था, किन्तु उस समय द्रौपदी हमारी रक्षक बनी थी।
 
Bhimsena! King Duryodhana, son of Dhritarashtra, in his desire to gain the kingdom, put us in trouble. He even made us his slaves, but at that time Draupadi became our protector.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)