Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.34.21: वह वीर पुरुष संसार की समस्त सम्पत्ति प्राप्त कर लेता है। मैं यह भी मानता हूँ कि उसके सभी शत्रु उसके सामने झुक जाते हैं। फिर थोड़े ही दिनों में उसके बहुत से मित्र बन जाते हैं और जैसे इन्द्र की सहायता से देवता जीवित रहते हैं, वैसे ही वे मित्र भी उस वीर के आश्रय में जीवित रहते हैं॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 3.34: धर्म और नीतिकी बात कहते हुए युधिष्ठिरकी अपनी प्रतिज्ञाके पालनरूप धर्मपर ही डटे रहनेकी घोषणा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह वीर पुरुष संसार की समस्त सम्पत्ति प्राप्त कर लेता है। मैं यह भी मानता हूँ कि उसके सभी शत्रु उसके सामने झुक जाते हैं। फिर थोड़े ही दिनों में उसके बहुत से मित्र बन जाते हैं और जैसे इन्द्र की सहायता से देवता जीवित रहते हैं, वैसे ही वे मित्र भी उस वीर के आश्रय में जीवित रहते हैं॥ 21॥
That brave man attains all the wealth in the world. I also believe that all his enemies bow down before him. Then within a few days he makes many friends and just like the gods survive with the help of Indra, in the same way those friends survive under the protection of that brave man.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥