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mahabharat 3.34.11: हे भरतवंशी नरेश! यदि आप सावधान रहें और मेरे गुप्तचरों को मोहित करके इतने समय तक अज्ञातवास करते रहें, तो मैं कौरवों की सभा में शपथपूर्वक कहता हूँ कि यह सम्पूर्ण पंचनद क्षेत्र पुनः आपके अधीन हो जाएगा॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 3.34: धर्म और नीतिकी बात कहते हुए युधिष्ठिरकी अपनी प्रतिज्ञाके पालनरूप धर्मपर ही डटे रहनेकी घोषणा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 34: धर्म और नीतिकी बात कहते हुए युधिष्ठिरकी अपनी प्रतिज्ञाके पालनरूप धर्मपर ही डटे रहनेकी घोषणा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.34.11 
चरेश्चेन्नोऽविदित: कालमेतं
युक्तो राजन् मोहयित्वा मदीयान्।
ब्रवीमि सत्यं कुरुसंसदीह
तवैव ता भारत पञ्च नद्य:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी नरेश! यदि आप सावधान रहें और मेरे गुप्तचरों को मोहित करके इतने समय तक अज्ञातवास करते रहें, तो मैं कौरवों की सभा में शपथपूर्वक कहता हूँ कि यह सम्पूर्ण पंचनद क्षेत्र पुनः आपके अधीन हो जाएगा॥ 11॥
 
'O King of the Bharata dynasty! If you remain cautious and keep moving around anonymously for this long time, having enchanted my spies, then I swear here in the assembly of the Kauravas that the entire Panchanad region will again be yours to control.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)