श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 34: धर्म और नीतिकी बात कहते हुए युधिष्ठिरकी अपनी प्रतिज्ञाके पालनरूप धर्मपर ही डटे रहनेकी घोषणा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.34.10 
त्वां चेच्छ्रुत्वा तात तथा चरन्त-
मवभोत्स्यन्ते भरतानां चराश्च।
अन्यांश्चरेथास्तावतोऽब्दांस्तथा त्वं
निश्चित्य तत् प्रतिजानीहि पार्थ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘कुन्तीकुमार! यदि भरतवंश के गुप्तचर आपके गुप्त निवास का पता लगाने लगें और यह जान लें कि आप अमुक स्थान पर अमुक रूप में निवास कर रहे हैं, तो आपको उतने ही वर्षों (बारह वर्षों) तक वन में रहना पड़ेगा। ऐसा निश्चय करके प्रतिज्ञा कर लो॥10॥
 
‘Kuntikumar! If the spies of the Bharat dynasty start to find out about your secret stay and come to know that you are living in a certain place in a certain form, then you will have to live in the forest for the same number of years (twelve). Decide on this and take a pledge about it.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)